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रविवार, 5 जून 2011

हमको अपने पी.एम.से कुछ प्रश्नों के जवाब चाहिये
उनके गद्दार मंत्रियों के दुष्कर्मों का हिंसाब चाहिये//
जब कोई सन्यासी भारत का सौदा करने वालों के विरुद्ध आवाज उठाता है
तो फिर क्यों उसकी आवाज को रात में दफनाने का षडयंत्र रचाया जाता है//
भारत का यह लोकतंत्र तुम्हारा कोई पुस्तैनी माकन नहीं
भारत का संविधान तुम्हारे षड्यंत्री हुक्मों का गुलाम नहीं//
भाषण और सम्मेलन की आजादी तो हम सब का मौलिक अधिकार है
सन्यासी संग बैठी जनता पर तुमको डंडे बरसाने का क्या अधिकार है//
-------'विवेक'

1 टिप्पणी:

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